अक्टूबर 2019

शक्ति और प्रेरणा के स्रोत बापू

सरदार वल्लभभाई पटेल

(गांधी के निधन पर भारत के लौहपुरुष का दिल भी रो पड़ा था। गांधी ने भारत को एकता के सूत्र में संगठित कर और वह भी अहिंसक तरीके से, पटेल ने गांधी के आदर्श को सार्थक किया था। पटेल की श्रद्धांजलि बापू को)

मेरा दिल दर्द से भरा हुआ है। क्या कहूं, क्या न कहूं! जबान चलती नहीं है। आज का अवसर भारतवर्ष के लिए सबसे बड़े दु:ख, शोक और शर्म का अवसर है। आज चार बजे मैं गांधीजी के पास गया था और एक घण्टे तक मैंने उनसे बात की थी। वह घड़ी निकालकर मुझसे कहने लगे, ‘‘मेरा प्रार्थना का समय आ गया है। अब मुझे जाने दीजिए।’’ वह भगवान के मन्दिर की तरफ अपने हमेशा के समय पर चलने के लिए निकल पड़े। तब मैं वहां से अपने मकान की तरफ चला। मैं मकान पर अभी पहुंचा भी नहीं था कि इतने में रास्ते में एक भाई मेरे पास आया। उसने कहा कि एक नौजवान हिन्दू ने गांधीजी के प्रार्थना की जगह पर आते ही अपनी पिस्तौल से उन पर तीन गोलियां चलार्इं, वह वहां गिर पड़े और उनको वहां से उठाकर घर में ले जाया गया है। मैं उसी वक्त वहां पहुंच गया। मैंने उनका चेहरा देखा। वही चेहरा था। वैसा ही शान्त चेहरा था, जैसा हमेशा रहता था। उनके दिल में दया और माफी के भाव अब भी उनके चेहरे पर प्रकट होते थे। आसपास बहुत लोग जमा हो गए। लेकिन वह तो अपना काम पूरा करके चले गये। पिछले चन्द दिनों में उनका दिल खट्ठा हो गया था और आखिर उन्होंने उपवास भी किया। उपवास में चले गये होते, तो अच्छा होता। लेकिन उनको और भी काम देना था तो रह गये। पिछले हफ्ते में एक दफा और एक हिन्दू नौजवान ने उनके ऊपर बम फेंकने की कोशिश की थी। उसमें भी वह बच गये थे। इस समय पर ही उनको जाना था। आज वह भगवान के मन्दिर में पहुंचे गये। यह बड़े दु:ख का, बड़े दर्द का, समय है। लेकिन यह गुस्से का समय नहीं है; क्योंकि हम इस वक्त गुस्सा करें, तो जो सबक उन्होंने हमको जिन्दगीभर सिखाया, उसे हम भूल जायेंगे और कहा जायेगा कि उनके जीवन में तो हमने उनकी बात नहीं मानी, उनकी मृत्यु के बाद भी हमने नहीं माना। हम पर यह धब्बा लगेगा। मेरी प्रार्थना है कि कितना भी दर्द हो, कितना भी दु:ख हो, कितना भी गुस्सा आये, लेकिन गुस्सा रोककर अपने पर काबू रखिये। अपने जीवन में उन्होंने हमें जो कुछ सिखाया, आज उसी की परीक्षा का समय है। बहुत शांति से, बहुत अदब से, बहुत विनय से एक-दूसरे के साथ मिलकर हमें मजबूती से पैर जमीन पर रखकर खड़ा रहना है। आप जानते हैं कि हमारे ऊपर जो बोझ पड़ रहा है, वह इतना भारी है कि करीब-करीब हमारी कमर टूट जायेगी। उनका एक सहारा था और हिन्दुस्तान को वह बहुत बड़ा सहारा था। हमको तो जीवनभर उन्हीं का सहारा था। आज वह चला गया। वह चला तो गया, लेकिन हर रोज, हर मिनट वह हमारी आंखों के सामने रहेगा। हमारे हृदय के सामने रहेगा; क्योंकि जो चीज वह हमको दे गया है, वह तो कभी हमारे पास से जायेगा नहीं। .... उनकी आत्मा तो अब भी हमारे बीच में है। अभी भी वह हमें देख रही है कि हम लोग क्या कर रहे हैं। वह तो हमर हैं। जो नौजवान पागल हो गया था, उसने व्यर्थ सोचा कि वह उनको मार सकता है। जो चीज उनके जीवन में पूरी न हुई, शायद ईश्वर की ऐसी मर्जी हो कि उनके द्वारा इस तरह से पूरी हो; क्योंकि इस प्रकार की मृत्यु से हिन्दुस्तान के नौजवानों का जो कॉनशंस (अन्तरात्मा) है, जो हृदय है, वह जाग्रत होगा, मैं ऐसी आशा करता हूं। मैं उम्मीद करता हूं और हम सब ईश्वर से प्रार्थना करेंगे कि जो काम वह हमारे ऊपर बाकी छोड़ गये हैं, उसे पूरा करने में हम कायमाब हों। मैं यह उम्मीद करता हूं कि इस कठिन समय में भी हम पस्त नहीं हो जायेंगे, हम ना हिम्मत भी नहीं हो जाएंगे। सबको दृढ़ता से और हिम्मत से एक साथ खड़ा होकर इस बहुत बड़ी मुसीबत का मुकाबला करना है और जो बाकी काम उन्होंने हमारे ऊपर छोड़ा है, उसे पूरा करना है ईश्वर से प्रार्थना कर, आज हम निश्चय कर लें कि हम उनके बाकी काम को पूरा करेंगे। जब से गांधीजी हिन्दुस्तान में आये, तबसे या जब मैंने जाहिर जीवन शुरू किया तब से, मैं उनके साथ रहा हूं। अगर वे हिन्दुस्तान न आये होते तो मैं कहां जाता और क्या करता, इसका जब मैं ख्याल करता हूं तो एक हैरानी-सी होती है। गांधीजी ने मेरे जीवन में कितना पलटा किया। यदि वह हिन्दुस्तान में न आये होते तो राष्ट्र कहां जाता? हिन्दुस्तान कहां होता? सदियों से हम गिरे हुए थे। वह हमें उठाकर कहां तक ले आये? उन्होंने हमें आजाद बनाया। उनके हिन्दुस्तान आने के बाद क्या-क्या हुआ और किस तरह से उन्होंने हमें उठाया, कितनी दफा, किस-किस प्रकार की तकलीफें उन्होंने उठार्इं, कितनी दफे वह जेलखाने में गये और कितनी दफे उपवास किया, यह सब आज ख्याल आता है। कितने धीरज से, कितनी शान्ति से, वह तकलीफें उठाते रहे और आखिर आजादी के सब दरवाजे पार कर हमें उन्होंने आजादी दिलवाई।