जुलाई 2019

लोकतंत्र की खूबसूरती बढ़ाने वाले तीन चेहरे

सत्यम खंडेलवाल

सत्रहवीं लोकसभा में वैसे तो विभिन्न दलों की कुल 78 महिलाएं चुनी गई हैं, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यह पहला मौका है, जब देश की सबसे बडी पंचायत में इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची हैं। इन महिलाओं में ओडिशा की 70 वर्षीय प्रमिला बिसोई और 25 वर्षीय चंद्राणी मुर्मू तथा केरल की 33 वर्षीय राम्या हरिदास भी शामिल हैं। बिल्कुल साधारण पृष्ठभूमि की ये तीन महिलाएं अब न सिर्फ लोकसभा की सदस्य हैं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती और उम्मीद भी हैं।

आम चुनाव के नतीजे आने के बाद यह चर्चा तो खूब हुई कि इस लोकसभा में अब तक की सबसे ज्यादा महिलाएं पहुंची हैं। इन महिलाओं में अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल को हराकर पहली बार लोकसभा पहुंची टेलीविजन की पूर्व कलाकार स्मृति ईरानी की भी खूब चर्चा हुई। लेकिन यह चर्चा बहुत ही कम हुई कि ओडिशा जैसे पिछड़े राज्य ने अपने यहां से लोकसभा में 33 प्रतिशत महिलाओं को भेजने का कारनामा कर दिखाया, जबकि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के 33 फीसद आरक्षण वाला प्रस्ताव बरसों से लटका पड़ा है। यह चर्चा भी बहुत कम हुई कि ओडिशा से दो और केरल से एक ऐसी साधारण पृष्ठभूमि वाली महिला लोकसभा में पहुंची हैं, जिन्होंने कभी ग्राम सभा का चुनाव तक नहीं लड़ा था। प्रमिला बिसोई: आंगनवाड़ी कुक से सांसद बनीं ओडिशा की प्रमिला बिसोई कभी आंगनवाड़ी में खाना बनाने का काम करती थीं, फिर उन्होंने बड़े पैमाने पर महिलाओं को स्वरोजगार में सहायता की और अब 17वीं लोकसभा में सांसद चुनी गई हैं। साड़ी, माथे पर बिंदी, स्पष्ट तौर पर दिखने वाला सिंदूर और नाक में पारंपरिक नोज़ पिन पहनने वाली 70 वर्षीय प्रमिला बिसोई बीजू जनता दल (बीजेडी) के टिकट पर ओडिशा की अस्का लोकसभा सीट से चुनाव जीती हैं। उनकी जीत का अंतर दो लाख से अधिक वोटों का था। स्थानीय लोग उन्हें प्यार से 'परी मां' कहते हैं। स्वयं-सहायता समूह की एक आम औरत से सांसद तक का उनका सफ़र एक फिल्मी कहानी की तरह है। सिर्फ पांच साल की उम्र में प्रमिला की शादी कर दी गई थी। इसलिए वे आगे पढ़ाई भी नहीं कर पाईं। इसके बाद प्रमिला ने गांव में ही आंगनवाड़ी रसोइया के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। फिर उन्होंने गांव में ही एक स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। उन्हें बहुत जल्दी सफलता मिली और वह ओडिशा के महिला स्वयं सहायता समूह के 'मिशन शक्ति' की प्रतिनिधि बन गईं। बीजेडी सरकार ने प्रमिला बिसोई को अपनी महत्वाकांक्षी योजना मिशन शक्ति का चेहरा बना दिया। दावा है कि इस योजना से 70 लाख महिलाओं को फायदा मिला। मार्च में प्रमिला बिसोई की उम्मीदवारी का ऐलान करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा था, "यह मिशन शक्ति से जुड़ी लाखों महिलाओं के लिए एक उपहार है।" प्रमिला के पति चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारी थे। उनके बड़े बेटे दिलीप चाय की दुकान चलाते हैं और छोटे बेटे रंजन की गाड़ियों की रिपेयरिंग की दुकान है। यह परिवार एक टीन की छत वाले एक छोटे से घर में रहता है। उनके पड़ोसी जगन्नाथ गौड़ा उन्हें बचपन से जानते हैं। वह कहते हैं, "उन्होंने सिर्फ तीसरी क्लास तक पढ़ाई की है पर उन्होंने पास के गांवों में रहने वाली ग़रीब महिलाओं की ज़िंदगी बदल दी है। वह 15 साल से सक्रिय समाजसेवा में हैं। गांव में उनके प्रयास से एक इको पार्क बना है।" उनकी नेतृत्व क्षमता पर जगन्नाथ बताते हैं कि बहुत कम पढ़ाई करने के बावजूद प्रमिला सामयिक घटनाओं पर तुरंत गीत रचने का हुनर रखती हैं और महिलाओं को प्रेरित करने के लिए उन्हें गाती भी हैं। जगन्नाथ कहते हैं कि प्रमिला के पास एक एकड़ से कुछ कम खेत है, जिसमें काम करने वह कई बार ख़ुद जाती हैं। प्रमिला के साथ स्वयं सहायता समूह में काम कर चुकीं शकुंतला ने बताया कि उनके समूह की महिलाएं प्रमिला को माँ की तरह मानती हैं। दस साल पहले प्रमिला के कहने पर ही शकुंतला और गांव की 14 महिलाओं ने मिलकर एक स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की थी। समूह की महिलाओं ने चर्चा करके मक्का, मूंगफली और सब्ज़ियों की खेती शुरू की और इससे उनकी आमदनी में काफ़ी इज़ाफा हुआ। प्रमिला ठीक से हिंदी नहीं बोल सकतीं। लेकिन अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' से बातचीत में उन्होंने इस दलील को ख़ारिज़ कर दिया कि राष्ट्रीय राजनीति में सिर्फ हिंदी या अंग्रेज़ी बोलने वाले ही सफल हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "मैं गर्व से संसद में अपनी मातृभाषा उड़िया में ही बोलूंगी।" 17वीं लोकसभा की सबसे युवा सांसद चंद्राणी मुर्मू भी एक ऐसा नाम है, जो इन दिनों खूब सुर्खियों में है। लोकसभा चुनाव में ओडिशा की सात महिला सांसदों में चंद्राणी मुर्मू एक ऐसा नाम है जिसकी हर तरफ चर्चा है। यह 17वीं लोकसभा की सबसे युवा सदस्य हैं। दो साल पहले मैकेनिकल इंजीनियर की पढ़ाई करने के बाद चंद्राणी सरकारी नौकरी की तैयारी कर अपने भविष्य को सुरक्षित करने में लगी थीं। लेकिन, शायद चंद्राणी भी नहीं जानती होंगी कि उनके भाग्य में क्या लिखा है। उनके हाथ की यह राजनीतिक रेखा उनके पूरे आदिवासी इलाके का भविष्य बेहतर बनाने का रास्ता दिखाएगी। राज्य के क्योंझर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली चंद्राणी ने महज 25 साल 11 महीने की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की है। इसी के साथ चंद्राणी ने दुष्यंत का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दुष्यंत 26 बरस की उम्र में पिछली लोकसभा के सबसे युवा सांसद थे। चंद्राणी ने 2017 में भुवनेश्वर की शिक्षा ओ अनुसंधान यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री ली और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं, जब उनके मामा ने अचानक चुनाव लड़ने के बारे में उनसे पूछा। चंद्राणी का कहना है कि वह अपने लिए किसी अच्छे कॅरियर की तलाश में थीं और वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह राजनीति में आएंगी। लेकिन क्योंझर महिला आरक्षित क्षेत्र था और बीजू जनता दल को किसी पढ़ी-लिखी महिला उम्मीदवार की जरूरत थी। यही दोनों बातें चंद्राणी के हक में रहीं। चंद्राणी का जन्म 16 जून 1994 में हुआ था। उनके पिता का नाम संजीव मुर्मू है, जो एक सरकारी कर्मचारी हैं। वह अपनी बेटी के लिए कुछ इसी तरह का भविष्य चाहते थे। पढ़ा लिखा होना चंद्राणी के काम आया । उम्मीदवारी के लिए दाखिल किए गए नामांकन के पर्चों में सभी को अपनी चल और अचल संपति की जानकारी देना जरूरी होता है। चंद्राणी के पास न बंगला है, न गाड़ी, न जमीन-जायदाद और न ही लंबा-चौड़ा बैंक बैलेंस। उनके पास किसी कंपनी के शेयर नहीं हैं और न ही कोई भारी- भरकम बीमा पॉलिसी है। संपत्ति के नाम पर उनके पास महज 20 हजार रुपये हैं। ऐसे में एक साधारण परिवार की इस लड़की का संसद तक पहुंचना किसी सपने के सच होने जैसा है। चंद्राणी अपने क्षेत्र में कुछ नया करके जनता से मिली इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाना चाहती हैं। संसद पहुंची इस मज़दूर की बेटी को राहुल गांधी ने खोजा था राम्या हरिदास। केरल की इस 33 साल की महिला का नाम शायद ही आपने इससे पहले सुना होगा। वह केरल से चुनी गई अब तक की दूसरी दलित महिला सांसद हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के गढ़ अलथुरा में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। दो बार के सांसद डॉ। पीके बीजू को हराया। राम्या को 5,33,815 वोट मिले। उन्होंने 1,58,968 वोटों से जीत हासिल की। अंग्रेजी अखबार लाइव मिंट की खबर के मुताबिक, राम्या हरिदास मजदूर की बेटी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें लोकसभा इलेक्शन के लिए सलेक्ट किया था। वह अकेली ऐसी महिला हैं, जो केरल से संसद के लिए चुनी गई हैं। वह गांधी टैलेंट हंट की टॉपर थीं। यह टैलेंट हंट 2010 में भविष्य के नेता चुनने के लिए आयोजित किया गया था। सांसद बनने से पहले वह कोझिकोड म्युनसिपाल्टी की प्रमुख थीं। राम्या एक प्रतिभाशाली कलाकार हैं। वह एक अच्छी सिंगर हैं। उन्होंने गाना गा कर चुनाव प्रचार किया। हालांकि उनके विरोधियों ने उनकी छवि 'गर्ल नेक्स्ट डोर' वाली बनाई। गाना गाकर प्रचार करने के लिए उनका मजाक उड़ाया गया। देश का सबसे शिक्षित राज्य कई मामलों में आगे रहा है लेकिन महिला सांसद चुनने में केरल का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। हरिदास उन दो महिलाओं में से एक हैं, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। दूसरी महिला शनिमोल उस्मान एक मात्र प्रत्याशी हैं, जो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हार गईं। जीत के बाद राम्या हरिदास ने वोटर्स का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि अलथुरा के लोगों ने हर समय मेरा साथ दिया। वह विवादों के दौरान भी मेरे साथ रहे। एक प्रतिनिधि के तौर पर मैं हमेशा यहां के लोगों के साथ रहूंगी। राम्या ने गाना गाकर अपनी जीत का जश्न मनाया। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने राम्या की जीत की खबर को ट्वीट कर लिखा, राहुल गांधी द्वारा चुनी गई राम्या हरिदास, जो एक मजदूर की बेटी हैं, ने इतिहास रच दिया है। कौन कहता है कि राजनीतिक परिवार से आने वाले नेताओं के अलावा किसी और के लिए कांग्रेस में जगह नहीं है।