फरवरी 2019

आरक्षण जिंदाबाद...मोदी जिंदाबाद !!!

हेमंत कुमार झा

अब बहुत कुछ बदलने वाला है। समझो, समय की नदी ने धारा ही बदल ली हो। अब आरक्षण वाले इंजीनियरों के बनाए पुलों के पाये कमजोर नहीं होंगे, अब कोटे वाले डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट में रूमाल नहीं छोड़ेंगे, अब आरक्षण से मास्टरी पाए लोग सरकारी स्कूलों को बर्बाद नहीं करेंगे। जब सब आरक्षण वाले ही रहेंगे तो ऐसे घटिया कमेंट कौन ,किस पर करेगा? सब मिल कर आरक्षण की गंगा में डुबकी लगाएंगे और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाएंगे।

अब... जब आर्थिक आधार पर आरक्षण का "मास्टर स्ट्रोक" लग ही गया तो बहुत सारी बातें होंगी। सवर्णों का भरोसा खोने के डर से दुबली होती भाजपा अब अपने कोर वोट बैंक से नए जोशो-खरोश के साथ मुखातिब होगी। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट भी किया..."यह हमारे देश के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है।" ऐतिहासिक तो है। आखिर पंडीत जी और ठाकुर साहब लोग भी अब आरक्षण की लज्जत महसूस करेंगे। जाने कब से हसरत भरी निगाहों के साथ टकटकी लगाए थे। और तो और...क्रिस्तानों के साथ ही मौलवी साहबों को भी अहसास होगा कि आरक्षण की बिरयानी कितनी लज़ीज़ होती है। बेकार में मोदी को अल्पसंख्यक विरोधी बोलते थे। एक झटके में मां भारती के तमाम लालों को एक सड़क पर दौड़ा दिया। क्या बामन, क्या ठाकुर, क्या लाला, क्या शेख, सैयद, पठान... एंथनी, मारिया...सब सरकारी दफ्तरों की दौड़ लगाएंगे...कि साहब, हम तो गरीब हैं, देखो मेरे बाप की तीन एकड़ ही जमीन है, मेरे बाप की तो डेढ़ एकड़ ही, मेरा तो पूरा खानदान सिर्फ एक दुकान पर पलता है, कि आजकल बाप की ठेकेदारी चल नहीं पा रही, बस इतनी ही आमदनी है। कुछ ले-दे के ही सही, गरीब होने का सर्टिफिकेट बना दो। इक्का-दुक्का छोड़ के अब सब गरीब होंगे। आखिर, इस देश में 8 लाख सालाना आमदनी है ही कितनों की? जिनकी है भी, वे गरीब का सर्टिफिकेट सबसे पहले पाएंगे। दिक्कत बस उन्हें होगी, जिनके बाप सरकारी नौकरी में बहुत ऊंचे वेतन पर होंगे। उनके अमीर होने का सबूत तो खुद सरकार बहादुर के पास है। अब सिर्फ वे ही इस लज्जत से महरूम रहेंगे। काश, बाप का वेतन थोड़ा कम रहता। बहुत कुछ बदलने वाला है अब। समझो, समय की नदी ने धारा ही बदल ली हो। अब आरक्षण वाले इंजीनियरों के बनाए पुलों के पाये कमजोर नहीं होंगे, अब कोटे वाले डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट में रूमाल नहीं छोड़ेंगे, अब आरक्षण से मास्टरी पाए लोग सरकारी स्कूलों को बर्बाद नहीं करेंगे। जब सब आरक्षण वाले ही रहेंगे तो ऐसे घटिया कमेंट कौन,किस पर करेगा? सब मिल कर आरक्षण की गंगा में डुबकी लगाएंगे और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाएंगे। अब 'मेरिटधारी' होने के अहंकार का भी लोप होगा। इस असार संसार में अहंकार मिथ्या है। इसके मिटने से ही मुक्ति है। अब पिछड़ों और दलितों की राजनीति करने वालों को भी पैंतरा बदलना होगा। अब कोटा बचाने की नहीं, बढ़ाने की लड़ाई होगी। 50 का 60 जब कर ही दिए प्रभु...तो लगे हाथ 80-90 भी कर ही दो। न हो तो 10 वालों को 15 दे दो...बाकी हमें। जब सब आरक्षण वाले ही हैं तो विरोध करने अब आएगा भी कौन? अब सब मिल कर आरक्षण की झांझ बजाएंगे। दसों दिशाएं गूंज उठेंगी। तुम सरकारी पदों को खत्म करते रहो, हम झांझ बजाते रहेंगे। तुम सरकारी स्कूलों को बंद करते रहो, सरकारी बैंकों को प्राइवेट बनाते रहो, सरकारी काम प्राइवेट कंपनियों को आउटसोर्स करते रहो, एचएएल का काम अंबानियों को देते रहो...हम कीर्तन करते रहेंगे। हमें नौकरी नहीं, हमें तो आरक्षण चाहिये था। वो मिल गया। हम तो धन्य हो गए। तुम्हारे पास भी नौकरी तो थी नहीं। हाँ, आरक्षण था तुम्हारे पास। तुमने दे दिया। धन्य हो तुम। जुग-जुग राज करो। जम के अंबानियों-अडानियों जैसों की दलाली करो, वालमार्ट जैसों के लिये कालीन बिछाओ। कोई जरूरत नहीं है छोटे व्यापारियों की चिन्ता करने की, कोई जरूरत नहीं है किसानों की फसलों को बिचौलियों से बचाने की। अब तो सबको आरक्षण है, फिर किसी को चिन्ता क्यों हो? इसे कहते हैं विजनरी नेता। इसे कहते हैं अच्छे दिन। बेवजह विरोधी लोग 'अच्छे दिनों' पर चुटकुला बना कर मजाक उड़ाते थे। हमने धीरज रखा, भक्ति नहीं छोड़ी। आए न अच्छे दिन...! सब तर गए। तुमने सबको तार दिया। तुम सच में अवतारी थे। अब देखना, तुम्हारे आभामंडल की चकाचौंध से विरोधियों की आंखें कैसे चुंधियाती हैं, हमारे कीर्तन से कैसा कोलाहल होता है...। बस...इतना कर दो प्रभु, किसी चेले की कंपनी को बढ़िया क्वालिटी का झांझ बनाने का बृहत ऑर्डर एकमुश्त दे दो और हम सब में मुफ्त बंटवा दो। और हाँ... उन झांझों पर पर बोल्ड अक्षरों में खुदवा देना...आरक्षण। झांझ की सामूहिक झनझनाहट से निकलती ध्वनियों में राष्ट्रीय एकता का स्वर गूंजेगा। अब आरक्षण राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक बन गया न! सबके सब इसके दायरे में जो आ गए। सच में...तुमने इतिहास बना दिया। अब जिनको इसमें भी खोट निकालना है, निकालते रहें। उनकी बला से। हम तो मगन हैं...प्रभु। ज़िन्दाबाद... ज़िन्दाबाद। (लेखक मगध विश्वविद्यालय, पटना में हिंदी के प्राध्यापक हैं)